- यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान |
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान ||बाबा जी के वचन इस मानव-जीवन का" परम संगीत" है जो सबको हर परिस्तिथी में आनंद से कैसे जिया जाये इसकी जानकारी देता है ! वस्तुतः जब कभी किसी महापुरुष ने कोई "ज्ञान "दिया है तो उन्होंने कभी इसे लिपिबद्ध नहीं करना उचित समझा है क्योकि प्रत्येक मनु...
ष्य एक चीज की अलग-अलग व्याख्या करने लगता है और जब से पूर्व में प्रचलित "श्रुतियों" को लिपिबद्ध किया जाने लगा तभी से लोगो में आपसी-वैमनष्यता ने जन्म लिया जिसका सबसे वीभत्स -रूप हमें आज बाबा जी विरुद्ध प्रायोजित दुष्प्रचार मे देखने को मिल रहा है.Media distorted the truth about Nirmal Baba
Monday, 3 September 2012
Great quote on religion
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respected baba ji,
ReplyDeletebaba ji please kripa karo,aur mujhe theek karo baba ji.kripa karo baba ji ,kripa karo
apki devotee